हमारे बारे में

इतिहास, आदर्श एवं नेतृत्व

1924

महाविद्यालय का इतिहास

डी.एम.जी. इंटर कॉलेज, डौरली की स्थापना सन् 1924 में महर्षि दयानन्द सरस्वती के आदर्शों को आधार बनाकर की गई थी। उस समय क्षेत्र में शिक्षा के अवसर सीमित थे और यह संस्था आसपास के गाँवों के लिए शिक्षा का पहला बड़ा केन्द्र बनी।

महाविद्यालय का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों से जुड़ा है। परिसर में महात्मा गांधी, चन्द्रशेखर आज़ाद, पं. जवाहरलाल नेहरू तथा लाल बहादुर शास्त्री जैसे राष्ट्रनायकों का स्मरण विद्यार्थियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।

आज महाविद्यालय में लगभग 1,078 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा 17 शिक्षक कार्यरत हैं। संस्था उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से सम्बद्ध, सहायता प्राप्त एवं सह-शिक्षा संस्थान है।

हमारा ध्येय

ग्रामीण एवं नगरीय पृष्ठभूमि के प्रत्येक विद्यार्थी तक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और मूल्य-आधारित शिक्षा पहुँचाना — जिससे वह आत्मनिर्भर नागरिक बने।

ज्ञान

पाठ्यक्रम की गहरी समझ और स्वतन्त्र चिन्तन की क्षमता।

अनुशासन

समय, नियम एवं परिश्रम के प्रति निष्ठा।

चरित्र

सत्य, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध।

समता

बालक-बालिका, ग्राम-नगर — सबके लिए समान अवसर।

प्रधानाचार्य का सन्देश

डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह पी-एच.डी. (भूगोल)

“विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास — शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ अनुशासन, चरित्र और राष्ट्रसेवा की भावना — ही हमारे महाविद्यालय का ध्येय रहा है।”

यह जानकारी महाविद्यालय कार्यालय द्वारा शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी।

शिक्षक वृन्द

17 — उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा चयनित

यह जानकारी महाविद्यालय कार्यालय द्वारा शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी।